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आज़ादी के पूर्व ब्रिटिशकाल में शिक्षा की दृष्टि से सम्पन्न रहा देवपरवा ग्राम जिसमें स्व० श्री गणेशदत्त दूबे द्वारा एक ज्ञान रूपी पौधा रोपा गया था. उसी पौधे को बट-वृक्ष बनाने के लिये उनके वंशजों द्वारा किये गए प्रयास से प्राइमरी पाठशाला, उच्च प्राथमिक पाठशाला, राजकीय हाई स्कूल व विन्ध्याज्ञान पब्लिक स्कूल का निर्माण कराया गया. इस समृद्धिशाली परम्परा को आगे बढ़ाने की कड़ी में माँ विंध्यवासिनी की असीम अनुकम्पा व बड़े भ्राता स्व० श्री अमरनाथ दूबे के आशीर्वाद व भ्रातागण श्री माता प्रसाद दूबे, श्री सुधाकर दूबे, श्री प्रभाकर दूबे, श्री गंगाधर दूबे द्वारा “सोनगंगा वेलफेयर सोसाइटी” को चार बीघा (१०१२९ वर्ग मीटर) जमीन दान देकर माता-पिता की स्मृति में “असेवित योजनान्तर्गत, उ०प्र० शासन द्वारा स्वीकृत” “महराजी देवी मूलचंद महाविद्यालय” (सह शिक्षा) का निर्माण करवाया गया. जिसका शिलान्यास दिनांक १०.०८.२०१५ सोमवार को विश्व शान्ति नोबेल पुरस्कार से सम्मानित माननीय कैलाश सत्यार्थी जी के कर कमलों द्वारा किया गया.